एक ही परिसर में दो स्कूल? अभिभावकों के मन में उठ रहे कई सवाल
हल्द्वानी सहित कई स्थानों पर ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहाँ एक ही कैंपस में दो अलग-अलग नामों से स्कूल संचालित हो रहे हैं। शिक्षा देना निश्चित रूप से एक सराहनीय कार्य है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह व्यवस्था तकनीकी और कानूनी रूप से सही है?
क्या दोनों स्कूलों को अलग-अलग मान्यता, NOC और विभागीय अनुमति मिली हुई है? क्या शिक्षा विभाग, CBSE या संबंधित प्राधिकरणों ने इसकी अनुमति दी है? यदि कोई भ्रम की स्थिति है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
सबसे बड़ी चिंता यह है कि कई अभिभावकों को आज तक स्पष्ट जानकारी नहीं होती कि उनका बच्चा जिस संस्थान में पढ़ रहा है, वह निजी स्कूल है, सरकारी है या अर्द्ध-सरकारी (Semi-Aided)। यही कारण है कि CBSE के 12 प्रमुख Disclosure Points बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं, जिन्हें अक्सर अभिभावक नजरअंदाज कर देते हैं।
इन 12 बिंदुओं में स्कूल की मान्यता, NOC, फीस संरचना, शिक्षक विवरण, भवन सुरक्षा, फायर सेफ्टी, छात्र-शिक्षक अनुपात, रिजल्ट, PTA/SMC जानकारी और अन्य सुरक्षा मानकों जैसी अहम जानकारियाँ शामिल होती हैं।
यह किसी एक स्कूल के खिलाफ अभियान नहीं है। यह केवल अभिभावकों और समाज का “जानने का अधिकार” है, क्योंकि बच्चों का भविष्य और सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। जरूरी है कि हर अभिभावक यह सुनिश्चित करे कि उनका बच्चा सही, मान्यता प्राप्त और नियमों के अनुरूप संस्थान में शिक्षा प्राप्त कर रहा है।