शासन के निर्देश पर नैनीताल CEO दफ्तर में सन्नाटा क्यों? ‘विकास शुल्क’ पर चुप्पी से निजी स्कूलों को मौन छूट का लगा आरोप, RTI दाखिल!
हल्द्वानी/नैनीताल:
उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। नैनीताल जिले के निजी स्कूलों में ‘विकास शुल्क’ (Development Fee) की वसूली को लेकर शासन के निर्देशों के बावजूद स्थिति स्पष्ट न होने से अभिभावकों में गहरा आक्रोश है।
मामला उत्तराखंड शासन के माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-3 से जुड़ा है, जहाँ अनु सचिव विकास कुमार श्रीवास्तव द्वारा 18 सितम्बर 2026 को मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) नैनीताल को पत्र (संख्या: 1281/XXIV/B-3/2026/75283) भेजकर 27 जून 2026 के आदेश के बिंदु संख्या-4 (‘विकास शुल्क’) को निरस्त/स्थगित करने के संदर्भ में तत्काल नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए थे।
परंतु शासन का पत्र जारी हुए तीन हफ्ते से अधिक बीत जाने के बाद भी CEO कार्यालय द्वारा निजी स्कूलों पर ‘विकास शुल्क’ की रोक को लेकर कोई स्पष्ट सार्वजनिक सर्कुलर या दंडात्मक आदेश सामने नहीं आया है।
अभिभावकों व आम जनता के तीखे सवाल:
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मौन सहमति या प्रशासनिक लापरवाही? जागरूक नागरिकों का आरोप है कि जिले के सक्षम अधिकारी द्वारा स्थिति स्पष्ट न किए जाने के कारण निजी स्कूल धड़ल्ले से अभिभावकों से विकास शुल्क वसूल रहे हैं।
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केवल नैनीताल में ही यह छूट क्यों? जब प्रदेश के अन्य जिलों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, तो नैनीताल जिले में 27 जून के आदेश के तहत निजी स्कूलों को विकास शुल्क का आधार क्यों और किसके कहने पर दिया गया था?
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शासन के निर्देशों का क्या औचित्य? यदि शासन के सचिवालय स्तर से जारी पत्राचार पर हफ़्तों तक जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं दिखता, तो प्रशासनिक पदानुक्रम (Hierarchy) की गरिमा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आरटीआई (RTI) से माँगा गया पूरा कच्चा-चिट्ठा:
इस पूरे मामले में पारदर्शिता लाने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए अब सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन दाखिल कर दिया गया है। आरटीआई के माध्यम से 18 सितम्बर के पत्र पर की गई दैनिक कार्यवाही की नोटशीट, कानूनी स्थिति और निजी स्कूलों के खिलाफ की गई जांच की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई हैं।
जनता सीधे पूछ रही है: क्या शासन के निर्देशों को ठंडे बस्ते में डालकर निजी संस्थानों को अप्रत्यक्ष लाभ पहुँचाना पद के दायित्वों की अनदेखी नहीं है?
