हल्द्वानी/नैनीताल:
उत्तराखंड के शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ज़मीनी हक़ीक़त देखकर हर कोई हैरान है—एक ही चारदीवारी और एक ही मुख्य गेट, लेकिन बोर्ड टंगे हैं दो-दो अलग स्कूलों के!
हल्द्वानी का मामला:
आवास विकास कॉलोनी स्थित सरकारी सहायता प्राप्त (Semi-Aided) विवेकानन्द पूर्व माध्यमिक विद्यालय की लीज भूमि और भवन निर्माण अनुदान वाले परिसर में ही ‘KIVI ACADEMY‘ का बोर्ड साफ़ दिखाई दे रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सहायता प्राप्त स्कूल में अब महज़ एक शिक्षक बचे हैं जो 2028 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। विद्यालय में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) को ही हर 6 माह में ‘प्रबंध संचालक’ की जिम्मेदारी दी जाती रही है। सवाल उठता है कि जब नियंत्रण विभागीय अधिकारी के हाथ में था, तो स्टाफ की तैनाती पर ठोस कदम क्यों नहीं उठे? क्या सहायता प्राप्त स्कूल के अस्तित्व पर संकट के बीच उसी परिसर में निजी इकाई का संचालन नियमों के अनुकूल है?
नैनीताल की स्थिति:
इसी तरह नैनीताल के ऐतिहासिक C.R.S.T Inter College परिसर की दीवारों पर भी ‘AMERICAN KIDZ‘ और ‘C.R.S.T Primary’ से जुड़े बोर्ड दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय स्तर पर जन-चर्चा है कि मूल विद्यालय के अलावा भिन्न यूनिफॉर्म में यह प्राथमिक इकाइयां किस विभागीय अनुमति से संचालित हो रही हैं?
विभाग और प्रशासन से सीधे सवाल:
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नगर निगम हल्द्वानी: जिस लीज भूमि पर सहायता प्राप्त विद्यालय स्वीकृत था, क्या उस परिसर में किसी निजी इकाई का समानांतर संचालन नियमों के तहत अनुमन्य है?
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शिक्षा विभाग (BEO/CEO,Nainital): RTE और मान्यता नियमों के तहत एक ही कैंपस में दो संस्थाओं के संचालन की क्या स्थिति है?
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जवाबदेही: क्या ज़िला प्रशासन और शासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करेगा?
